Friday, March 25, 2011

गीता ५/१८

विद्या विनय सम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि |
शुनि चैव श्वपाके  च पण्डिता: समदर्शिन: ||
[गीता ५/१८ ]
पंडितो की अर्थात ज्ञानियों की दृष्टि विद्या- विनय युक्त ब्राह्मण, गाय, हाथी, ऐसे ही कुत्ता और चांडाल,इन सभी के विषय में समान रहती है.

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