गिरते हैं समंदर में बड़े शौक से दरिया
लेकिन किसी दरया में समंदर नहीं गिरता |
हैरान है कई रोज से ठहरा हुआ पानी,
तालाब में अब क्यों कोई कंकर नहीं गिरता |
बैठ जाता हूँ जहाँ छावं घनी होती है,
हाय क्या चीज़ गरीब-उल-वतनी (away from homeland )होती है |
लेकिन किसी दरया में समंदर नहीं गिरता |
हैरान है कई रोज से ठहरा हुआ पानी,
तालाब में अब क्यों कोई कंकर नहीं गिरता |
बैठ जाता हूँ जहाँ छावं घनी होती है,
हाय क्या चीज़ गरीब-उल-वतनी (away from homeland )होती है |
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