Monday, June 27, 2011

samachar -dainik jagran

न होते आप दरमियां अली असगरJun 26,


 जौनपुर : 'न जाने लोग भटक कर कहां गये होते, न होते आप अगर दरमियां अली असगर' ये पंक्तियां शनिवार की रात बज्म-सालिकान-ए-राहे-अनीस की महफिल में याकूब नदीम ने पढ़ी तो लोगों ने सराहा। यह महफिल हजरत इमाम हुसैन के 6 माह के बच्चे हजरत अली असगर के जश्न के रूप में इमामबाड़ा नकी फाटक में आयोजित था।



महफिल का शुभारम्भ हदीस केसा पढ़कर किया गया। मास्टर जफर अब्बास काजमी के मिसरा 'जबीहे खालिक अकबर की जां अली असगर' पर अन्य शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत किया। एसएम अब्बास ने 'अजब करिश्मा यह सहराये करबला में हुआ, जमीन छू गयी एक आसमां अली असगर।' डा.मेहर अली ने पढ़ा 'कोई मिसाल जमाना न ला सका अब तक, कहां वो तीरे सितम और कहां अली असगर'। अब्बास काजमी ने पढ़ा 'लिए हैं हुस्न का एक कारवां अली असगर, चचा की जान महे जौफेशां अली असगर।' तनवीर जौनपुरी ने 'सिपाहे शाम को बेमौत मार डालेगा, दिखा के सूखी जबां बेजमा अली असगर' पढ़ा। अन्त में संस्था के संरक्षक डा.कमर अब्बास की तकरीर पर महफिल समाप्त हुई। कार्यक्रम का संचालन नातिक गाजीपुरी तथा संयोजक हैदर अब्बास ने सभी के प्रति शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर अली शब्बर, हैदर हुसैन जैदी, एसएम जमा, मास्टर मो.नसीम, मौलाना निसार मेंहदी, तहसीन शाहिद, अकबर हुसैन एडवोकेट, असगर मेंहदी, कमर रजा आदि मौजूद थे।



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