Monday, April 4, 2011

ईश्वर ही सच्चा साथी है।

एक महात्मा ने एक युवक को बताया कि दुनिया में केवल भगवान ही अपना है। माता-पिता की सेवा और पत्नी-बच्चों का पालन कर्तव्य समझकर करो, पर उनमें आसक्ति न रखो। युवक ने कहा, महाराज आप गलत कह रहे हैं। मेरे माता-पिता मुझे प्यार करते हैं। मेरी पत्नी तो मेरे बिना जिंदा भी नहीं रह सकती। इस पर संत ने उसे परिवारजनों की परीक्षा लेने कहा।

युवक महात्मा जी के बताए अनुसार घर पहुंच पलंग पर लेट गया और प्राणायाम द्वारा सांसों को रोककर निश्चेष्ट हो गया। परिवार वालों ने उसे मृत समझकर रोना-पीटना शुरू कर दिया। अचानक महात्मा वहां पहुंचे। उन्होंने कहा, ‘रोना बंद करो। इसे मैं अपनी सिद्धि से अभी जीवित किए देता हूं। एक कटोरा पानी लाओ।’ माता-पिता व पत्नी यह सुनकर बड़े खुश हुए। कटोरा भरकर पानी लाया गया।

महात्मा जी ने मंत्र पढ़ा और कटोरा उसके शरीर पर घुमाकर कहा, अब जो इस पानी को पीएगा, वह मर जाएगा और युवक जीवित हो जाएगा। कोई अपने प्राण त्यागने को तैयार नहीं था। तब महात्मा ने कहा, चलो मैं ही इसे परमात्मा का नाम लेकर पी लेता हूं। युवक निश्चल पड़ा यह सब देख रहा था। वह उठकर बोला, महाराज आप की बात बिलकुल सही है। रिश्ते-नाते सभी झूठे हैं। ईश्वर ही सच्चा साथी है।-अमर उजाला समाचार पत्र में छपा लेख   

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